Lucknow 2051 Master Plan: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को साल 2051 तक देश के सबसे विकसित और आधुनिक महानगरों की फेहरिस्त में शामिल करने के लिए एक ऐतिहासिक ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया है. दिल्ली-NCR की तर्ज पर अब यूपी में स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) का विस्तार होने जा रहा है, जिसके तहत लखनऊ शहर की सीमाएं बाराबंकी, उन्नाव और रायबरेली तक फैल जाएंगी. लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इस महत्वाकांक्षी ‘विजन लखनऊ 2051’ मास्टर प्लान को तैयार कर शासन को सौंप दिया है.
कर्मा इज बैक… अदिति यादव विवाद में कूदीं पूर्व सपा प्रवक्ता, अखिलेश यादव पर साधा निशाना
44,776 करोड़ से संवरेगा ‘नवाबों का शहर’
लखनऊ को विदेशों जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए 44,776 करोड़ रुपये की लागत का मेगा प्लान तैयार किया गया है. इस योजना के तहत न केवल शहर का भौगोलिक दायरा बढ़ेगा, बल्कि बुनियादी ढांचे का भी पूरी तरह से कायाकल्प किया जाएगा.
सड़क और ट्रांसपोर्ट पर खर्च होगा 65% बजट
इस मास्टर प्लान में सबसे बड़ा फोकस यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने पर है. कुल बजट का लगभग 65 फीसदी हिस्सा, यानी 28,879 करोड़ रुपये सिर्फ सड़क और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को मजबूत करने पर खर्च होंगे.
30 मिनट में बाराबंकी से उन्नाव
104 किलोमीटर लंबा आउटर रिंग रोड राजधानी का नया ‘ग्रोथ कॉरिडोर’ बनेगा, जिससे बाराबंकी से उन्नाव तक का सफर महज 30 मिनट में पूरा किया जा सकेगा.
20 मिनट नेबरहुड’ मॉडल
शहर में इस खास मॉडल को लागू किया जाएगा, ताकि किसी भी नागरिक को अपने घर से स्कूल, अस्पताल या कार्यस्थल तक पहुंचने में 20 मिनट से अधिक का समय न लगे.
रिंग रोड के किनारे बसेंगी 4 नई टाउनशिप
बढ़ती आबादी की जरूरतों को देखते हुए रिंग रोड के किनारे 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में चार नई टाउनशिप बसाने का प्रस्ताव है. मोहान रोड, सुलतानपुर रोड, रायबरेली रोड, हरदोई रोड, इन टाउनशिप में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से लेकर उच्च आय वर्ग तक के लोगों के लिए करीब 5 लाख नए आवास विकसित किए जाएंगे. इसके साथ ही लखनऊ को पूरी तरह ‘स्लम मुक्त’ (झुग्गी-झोपड़ी मुक्त) बनाने का लक्ष्य रखा गया है.
रोजगार का नया हब बनेगा लखनऊ: 7 लाख नौकरियों की उम्मीद
यह मेगा प्रोजेक्ट युवाओं के लिए रोजगार की असीम संभावनाएं लेकर आ रहा है. एलडीए के अनुमान के मुताबिक, इन योजनाओं से 2 लाख प्रत्यक्ष (Direct) और 5 लाख अप्रत्यक्ष (Indirect) रोजगार के अवसर पैदा होंगे. इसके लिए निम्नलिखित बड़े कदम उठाए जा रहे हैं, सीजी सिटी के पास 800 एकड़ में आईटी सिटी का दायरा बढ़ाया जाएगा. कानपुर रोड पर 500 एकड़ में लॉजिस्टिक हब और फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण होगा. व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक नया फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट भी विकसित किया जाएगा.
विरासत को नया रूप: कैसरबाग बनेगा नो-व्हीकल जोन
आधुनिकता के साथ-साथ लखनऊ की ऐतिहासिक पहचान को भी सहेजा जाएगा. सतखंडा, क्लॉक टावर, छोटा इमामबाड़ा और सफेद बारादरी को जोड़कर एक विशेष पर्यटन सर्किट विकसित होगा, हुसैनाबाद और कैसरबाग क्षेत्र के विकास पर विशेष जोर रहेगा. कैसरबाग क्षेत्र को चरणबद्ध तरीके से ‘नो-व्हीकल जोन’ में बदला जाएगा, जिससे यहां पैदल घूमने का आनंद लिया जा सके.
इंस्टाग्राम प्रेमी के लिए पत्नी ने की पति की हत्या, जांच में फर्जी निकला ‘मर्चेंट नेवी जवान’
तीन चरणों में लागू होगी योजना (2026 से 2051)
मुख्यमंत्री की अंतिम मंजूरी मिलते ही इस योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी. इस 25 वर्षीय महायोजना को तीन चरणों में अमलीजामा पहनाया जाएगा.
अल्पकालिक (Short-term): 2026 से 2030 तक
मध्यम अवधि (Medium-term): 2031 से 2040 तक
दीर्घकालिक (Long-term): 2041 से 2051 तक
यदि यह योजना समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतरती है, तो आने वाले 25 सालों में लखनऊ का क्षेत्रफल, बुनियादी ढांचा और जीवन स्तर एक नए वैश्विक स्तर पर दिखाई देगा.


