नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के शहरों के लिए आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. NCR रीजनल प्लान-2041 के तहत दिल्ली के चारों ओर एक विशाल औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स रिंग विकसित करने की योजना है. इसके तहत आधुनिक वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क, ड्राई पोर्ट, इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD), एयर-कार्गो टर्मिनल और मल्टीमॉडल फ्रेट हब का नेटवर्क तैयार किया जाएगा.
इस योजना का उद्देश्य केवल नए उद्योग स्थापित करना नहीं है, बल्कि विनिर्माण, भंडारण, माल ढुलाई, एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को एकीकृत आर्थिक नेटवर्क में जोड़ना है. प्रस्तावित योजना में गुरुग्राम को इस पूरे नेटवर्क के प्रमुख केंद्रों में रखा गया है.
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लॉजिस्टिक्स को मिलेगा इंडस्ट्रियल एक्टिविटी का दर्जा
प्रस्तावित प्लान में वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स के लिए भूमि उपयोग श्रेणी में बड़ा बदलाव करने की बात कही गई है. इन्हें औद्योगिक गतिविधि (Industrial Activity) का दर्जा देने का प्रस्ताव है. इससे लॉजिस्टिक्स के लिए जमीन की लागत कम होने की उम्मीद है. योजना का लक्ष्य माल ढुलाई की लागत को कम कर क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है. इसके साथ ही गहन औद्योगिक-लॉजिस्टिक्स विकास और पुराने शहरी क्षेत्रों के पुनर्विकास के लिए जमीन आरक्षित करने का भी प्रस्ताव है.
वेस्टर्न DFC से मिलेगा बड़ा फायदा
इस नेटवर्क के लिए जरूरी परिवहन ढांचा पहले से विकसित हो रहा है. जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से दादरी तक करीब 1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर चालू हो चुका है. ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर रोजाना 443 से अधिक मालगाड़ियां चलने का दावा किया गया है. डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनों से माल ढुलाई की क्षमता और गति बढ़ाने में मदद मिल रही है.
नांगल चौधरी में 886 एकड़ का मल्टीमॉडल हब
हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों को फ्रेट नेटवर्क से जोड़ने के लिए दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) के तहत महेंद्रगढ़ के नांगल चौधरी में करीब 886 एकड़ में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब विकसित किया जा रहा है. इस परियोजना में रेल, सड़क और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को एक साथ जोड़ने की योजना है. जून 2026 में परियोजना की रेल लाइन पर लोकोमोटिव का ट्रायल भी पूरा होने की जानकारी दी गई है.
गुरुग्राम-मानेसर-बावल बेल्ट बनेगी अहम कड़ी
पूरे औद्योगिक-लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में गुरुग्राम-मानेसर-बावल बेल्ट की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. गुरुग्राम को झज्जर, सोनीपत, चरखी दादरी, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, बागपत और अलवर के साथ प्रमुख लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के तौर पर विकसित करने की योजना है. इन इलाकों में इनलैंड कंटेनर डिपो, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और इंटीग्रेटेड फ्रेट कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है.
पुराने शहरों का भी होगा पुनर्विकास
योजना का फोकस सिर्फ नए इलाकों तक सीमित नहीं है. दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में ट्रैफिक तथा भीड़भाड़ कम करने के लिए ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के आसपास ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव है.
इन शहरों को औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है.
नोएडा एयरपोर्ट बनेगा कार्गो नेटवर्क की अहम कड़ी
इस पूरे नेटवर्क में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है. पहले चरण में करीब ₹11,200 करोड़ के निवेश से विकसित हो रहे एयरपोर्ट का मल्टीमॉडल कार्गो हब शुरुआती स्तर पर सालाना करीब 2.5 लाख मीट्रिक टन कार्गो संभालने की क्षमता रखने की योजना है.
दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम को एयरपोर्ट से जोड़ने के लिए करीब ₹3,630 करोड़ की लागत से 31.42 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर भी विकसित किया जा रहा है. अगर यह पूरा नेटवर्क प्रस्ताव के अनुसार विकसित होता है, तो गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, मानेसर, बावल और आसपास के NCR शहरों में उद्योग, वेयरहाउसिंग, परिवहन और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है.
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