नई दिल्ली. सहारा की सहकारी समितियों के वास्तविक जमाकर्ताओं के दावों के त्वरित निपटान के लिए CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल को फिर से बहाल कर दिया गया है. सहकारिता मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 41,56,711 जमाकर्ताओं को उनके आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे 9,267 करोड़ रुपये की राशि वापस की जा चुकी है.
पोर्टल के जरिए करीब 20 लाख आवेदन अभी भी प्रसंस्करण के लिए लंबित हैं. पोर्टल और इससे जुड़ी सत्यापन प्रणालियों के बहाल होने के बाद इन दावों की जांच और रिफंड की प्रक्रिया दोबारा शुरू हो गई है.
यह भी पढ़ें- ग्रेटर नोएडा को बड़ी सौगात! डीपी वर्ल्ड बनाएगी 174 एकड़ में हाई-टेक लॉजिस्टिक पार्क, 5 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
41.56 लाख जमाकर्ताओं को मिले 9,267 करोड़ रुपये
सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, अब तक 41,56,711 जमाकर्ताओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में कुल 9,267 करोड़ रुपये सीधे जमा किए जा चुके हैं.
रिफंड प्रक्रिया में करीब 20 लाख आवेदन अभी प्रसंस्करण के लिए बाकी हैं. पोर्टल के दोबारा सक्रिय होने के बाद इन लंबित दावों का सत्यापन और पात्र जमाकर्ताओं को भुगतान करने की प्रक्रिया फिर शुरू कर दी गई है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप चल रही प्रक्रिया
सहारा सहकारी समितियों के वास्तविक और पात्र जमाकर्ताओं को उनकी देय राशि लौटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के 29 मार्च 2023 के आदेश के अनुरूप शुरू की गई है.
सहकारिता मंत्रालय के मुताबिक, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारी क्षेत्र में जनता का विश्वास मजबूत करने और सदस्यों के हितों की रक्षा करने की दिशा में की जा रही है.
नवंबर 2025 में प्रभावित हुआ था कामकाज
सहारा सहकारी समितियों का कामकाज नवंबर 2025 में प्रभावित हुआ था. कुछ मामलों में सहारा समितियों से असंबद्ध गतिविधियों के कारण उनके परिसरों को सील किए जाने से परिचालन संबंधी दिक्कतें पैदा हुई थीं.
इसके अलावा हार्डवेयर और Annual Maintenance Contract यानी AMC से जुड़ी बकाया राशि, जरूरी IT infrastructure और licenses के renewal से संबंधित समस्याएं भी सामने आई थीं. मानव संसाधन और प्रशासनिक मामलों से जुड़ी बाधाओं का भी रिफंड प्रक्रिया पर असर पड़ा.
रिफंड सत्यापन की प्रणालियां हुई थीं बाधित
प्रशासनिक, वित्तीय, परिचालन और तकनीकी बाधाओं के चलते रिफंड दावों के सत्यापन और processing के लिए जरूरी प्रणालियों का संचालन प्रभावित हुआ.
इसका सीधा असर जमाकर्ताओं के दावों की जांच और भुगतान की प्रक्रिया पर पड़ा. इसी वजह से लंबित दावों के निपटारे की रफ्तार प्रभावित हुई थी.
मंत्रालय ने बाधाएं दूर कर पोर्टल किया बहाल
सहकारिता मंत्रालय और CRCS ने रिफंड व्यवस्था में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए संबंधित हितधारकों के साथ समन्वय किया.
उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों और संबंधित प्राधिकरणों के साथ संस्थागत स्तर पर लगातार काम किया गया. इसके जरिए जरूरी systems, IT infrastructure और प्रशासनिक कामकाज से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया गया. इसके बाद पोर्टल और उससे जुड़ी verification systems को दोबारा बहाल किया जा सका.
चार सहारा समितियों के दावों की processing फिर शुरू
पोर्टल और सत्यापन व्यवस्था बहाल होने के बाद सहारा समूह की चार सहकारी समितियों के वास्तविक जमाकर्ताओं के वैध देय राशि वाले दावों का processing फिर शुरू हो गया है.
इनमें सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, लखनऊ, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड, भोपाल, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, कोलकाता और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, हैदराबाद शामिल हैं.
डिजिटल और पेपरलेस तरीके से हो रहा रिफंड
सहकारिता मंत्रालय के मुताबिक, रिफंड प्रक्रिया CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल के जरिए डिजिटल और paperless तरीके से संचालित की जा रही है.
सरकार ने 18 जुलाई 2023 को यह dedicated online portal शुरू किया था. इसके जरिए जमाकर्ता बिना किसी physical paperwork के अपना refund application जमा कर सकते हैं. साथ ही पूरी प्रक्रिया का digital record तैयार होता है.
आधार e-KYC से हो रहा दावों का सत्यापन
दावों की processing आधार e-KYC और संबंधित सहकारी समितियों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर की जाती है.
इस दौरान जमाकर्ता, सदस्यता और खाते से जुड़ी जानकारी का मिलान किया जाता है. इसके अलावा deposit certificates, receipts और अन्य निर्धारित documents की भी जांच की जाती है.
सत्यापन की यह प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के तहत स्थापित निगरानी व्यवस्था और अनुमोदित Standard Operating Procedure यानी SOP के अनुसार की जाती है.
सफल सत्यापन के बाद सीधे बैंक खाते में पैसा
जब किसी दावे का सत्यापन सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है, तो पात्र रिफंड राशि सीधे जमाकर्ता के आधार से जुड़े बैंक खाते में जमा की जाती है.
इस व्यवस्था का उद्देश्य रिफंड प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और verification-based बनाए रखना है.
IT और प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत की गई
सहकारिता मंत्रालय और CRCS ने लंबित दावों के processing को तेज करने के लिए IT infrastructure को मजबूत किया है.
जरूरी systems और licenses के renewal के साथ operational समस्याओं को दूर किया गया है. इसके अलावा मानव संसाधन और दूसरे प्रशासनिक मामलों से जुड़ी बाधाओं के समाधान के लिए भी कदम उठाए गए हैं.
जमाकर्ताओं को केवल आधिकारिक पोर्टल इस्तेमाल करने की सलाह
मंत्रालय ने जमाकर्ताओं से नए दावे प्रस्तुत करने के लिए केवल आधिकारिक CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल का इस्तेमाल करने की अपील की है.
नए दावों के लिए mocrefund.crcs.gov.in और जमा किए गए दावों में त्रुटियों के सुधार के लिए सूचना मिलने पर mocresubmit.crcs.gov.in पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है.
जमाकर्ताओं से निर्धारित प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी शर्तों का पालन करने को कहा गया है.
यह भी पढ़ें- हरियाणा में गुरुग्राम-सोनीपत समेत 13 शहरों में बसेंगे नए सेक्टर, 33 हजार एकड़ जमीन खरीदेगी सरकार
अनधिकृत माध्यमों से बचने की अपील
सहकारिता मंत्रालय ने जमाकर्ताओं को अनधिकृत माध्यमों और भ्रामक दावों से सावधान रहने की सलाह दी है.
मंत्रालय के मुताबिक, निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा जमा करने या जरूरत पड़ने पर दोबारा जमा करने से सत्यापन में समय लगने वाली दिक्कतों को कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही इससे जमाकर्ताओं को गलत या अनधिकृत माध्यमों से बचाने में भी सहायता मिलेगी.


