फिर एक फरवरी आई है,
टीवी पर वही पुराना सीन,
फाइलें खुलीं, कैमरे चमके,
मिडिल क्लास फिर रह गया मीन.
कुर्सी पर बैठा है वो वर्ग,
जो टैक्स भी देता, सपने भी,
जिसकी थाली में महंगाई,
और किस्मत में बस वादे भी.
Budget 2026-27: लखपति दीदी योजना से लेकर बायोफर्मा शक्ति तक, बजट 2026 की 11 बड़ी योजनाएं
बजट बोला- ‘सबका विकास’,
हम बोले- ‘हम भी तो सब हैं’,
पर स्लैब में नाम हमारा,
हर बार ही क्यों जब-तब है?
कभी कह देते हो- ‘आप अमीर’,
कभी बोलते- ‘थोड़ा और दो’,
EMI, स्कूल, बिजली-पानी,
अब सांस लेने पर भी कर लो टैक्स थो.
घर खरीदो तो स्टांप ड्यूटी,
गाड़ी लो तो GST भारी,
कमाओ तो इनकम टैक्स,
मर जाओ तो भी रजिस्ट्री जारी.
बजट 2026 आया साहब,
हमने फिर उम्मीदें बोईं,
सोचा इस बार कुछ मिलेगा,
पर कहानी वही की वही होई.
किसान को राहत, युवा को स्किल,
उद्योगों को इंसेंटिव मिला,
पर जो नौकरी में पिसता रहा,
उसके हिस्से बस भाषण खिला.
ना टैक्स में ढील, ना बचत सहारा,
ना होम लोन में कोई राहत,
मिडिल क्लास बोले- ‘सरकार,
क्या हमारी भी कोई है औकात?’
हर साल भाषण में नाम हमारा,
‘रीढ़ है देश की’- सुनते आए,
पर रीढ़ पर बोझ इतना डाला,
कि अब झुककर चलने की आदत बनाए.
बचत करो- महंगाई खाए,
खर्च करो- टैक्स बढ़ जाए,
निवेश करो- रिस्क समझाया,
ना करो तो भविष्य डराए.
बजट बोले- ‘डिजिटल बनो’,
हम बोले- ‘नेट भी महंगा है’,
बोले- ‘स्वास्थ्य सुविधा बढ़ी’,
पर प्रीमियम तो और चढ़ा है.
बच्चे पढ़ाओ तो फीस आसमान,
बुजुर्ग संभालो तो दवा महंगी,
मिडिल क्लास की कहानी साहब,
हर लाइन में थोड़ी तंगी.
फिर भी ताली बजा दी हमने,
फिर भी राष्ट्रगान गाया हमने,
हर बार की तरह इस बार भी,
अपने हिस्से का सपना दबाया हमने.
क्योंकि हम वो वर्ग हैं साहब,
जो शिकायत कम, भरोसा ज्यादा करता है,
हर बजट के बाद भी अगली बार,
उम्मीद का खाता फिर भरता है.
बजट 2026 चला जाएगा,
2027 फिर आएगा,
मिडिल क्लास वही रहेगा,
और सवाल वही दोहराएगा,
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‘क्या कभी ऐसा बजट आएगा,
जिसमें हम भी मुस्कुराएंगे?’
या हर बार की तरह फिर हम,
खाली हाथ ही घर लौट जाएंगे?


