UP News: आजमगढ़ के सरायमीर स्थित शालीमार रेस्टोरेंट में शैक्षणिक संस्थानों में जातीय भेदभाव के खिलाफ सशक्त यूजीसी रेगुलेशन लागू करने की मांग को लेकर पूर्व छात्र नेताओं ने पत्रकार वार्ता की. इस दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़े पूर्व छात्र नेताओं ने सरकार से इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की अपील की और आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव से आगामी संसद सत्र में इस विषय को उठाने की मांग की.
पत्रकार वार्ता को जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली के कलीम जमाई, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राजीव यादव, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वीरेंद्र यादव, यूपी कॉलेज के डॉ. राजेंद्र यादव और सत्यम प्रजापति सहित कई पूर्व छात्र नेताओं ने संबोधित किया. वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव की घटनाओं को देखते हुए यूजीसी द्वारा बनाए गए रेगुलेशन को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए.
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पूर्व छात्र नेताओं ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर आजमगढ़ समेत प्रदेश और देश के कई हिस्सों में छात्र और युवा सड़क पर उतरकर आवाज उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आजमगढ़ सामाजिक न्याय की धरती रही है, जहां राम बचन यादव, चंद्रजीत यादव, रामधन राम, राम नरेश यादव, मौलवी मसूद खान और राम कृष्ण यादव जैसे नेताओं ने हर दौर में वंचित वर्गों की आवाज बुलंद की है.
वक्ताओं ने कहा कि जब यूजीसी स्वयं यह स्वीकार कर चुका है कि विश्वविद्यालयों में जातीय भेदभाव जैसी समस्याएं मौजूद हैं, तो ऐसे में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे आजमगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव को संसद में इस मुद्दे को मजबूती से उठाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय से जुड़े कई मुद्दों को धर्मेंद्र यादव संसद में उठाते रहे हैं, लेकिन यूजीसी रेगुलेशन के मुद्दे पर उनकी और समाजवादी पार्टी की चुप्पी पीडीए की अवधारणा पर सवाल खड़े करती है.
पूर्व छात्र नेताओं ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी अपील की कि वह अपने सांसदों के साथ संसद में यूजीसी रेगुलेशन को लागू करने के लिए आवाज उठाएं. साथ ही इंडिया गठबंधन के दलों से भी इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ने की मांग की गई.
वक्ताओं ने कहा कि यदि राजनीतिक दल यह सोचते हैं कि वे इस मुद्दे पर चुप रहेंगे और एससी, एसटी तथा ओबीसी समाज इसे नहीं समझेगा, तो यह उनका भ्रम है. देश का सबसे कमजोर तबका अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालयों में भेजता है और यदि वहां उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़े या उन्हें परेशान किया जाए, तो समाज चुप नहीं रहेगा.
इसके साथ ही उन्होंने जाति जनगणना के मुद्दे का भी जिक्र किया और कहा कि जाति जनगणना की घोषणा के बावजूद वर्तमान जनगणना फॉर्म में जाति का कॉलम नहीं होना चिंता का विषय है. इसलिए जाति जनगणना कराने के लिए भी मजबूती से आवाज उठाने की जरूरत है.
पूर्व छात्र नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी संसद सत्र में यह मुद्दा नहीं उठाया गया तो सांसदों का घेराव किया जाएगा. उन्होंने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी समाज के सांसदों को यह समझना चाहिए कि वे समाज के प्रतिनिधि हैं और यदि वे बच्चों के भविष्य से जुड़े ऐसे गंभीर सवालों पर चुप रहते हैं, तो समाज उन्हें माफ नहीं करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि यूजीसी रेगुलेशन को लागू कराने के लिए आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा.


