Weather Update 5 June: भारत में मानसून का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 4 जून 2026 को आधिकारिक रूप से केरल में प्रवेश कर लिया है. इसके साथ ही देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने लगा है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए भारी बारिश, तेज आंधी, बिजली गिरने और तेज हवाओं को लेकर व्यापक चेतावनी जारी की है.
IMD के नवीनतम बुलेटिन के मुताबिक पूर्वोत्तर भारत, दक्षिण भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य भारत के कई राज्यों में 5 जून से मौसम गतिविधियां तेज रहने वाली हैं. कई इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज होने की संभावना है.
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केरल में मानसून का आगमन, दक्षिण भारत में बारिश का दौर तेज
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने निर्धारित समय के आसपास केरल में दस्तक दे दी है. मानसून के सक्रिय होने के साथ केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में वर्षा गतिविधियां बढ़ गई हैं.
अगले सात दिनों के दौरान केरल और कर्नाटक के अलग-अलग इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है. कई स्थानों पर 7 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज हो सकती है. तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भी भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है.
केरल, तटीय कर्नाटक और आंतरिक कर्नाटक के कई जिलों में जलभराव और स्थानीय बाढ़ जैसी स्थितियां बनने की आशंका है. ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग द्वारा जारी अपडेट पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है.
पूर्वोत्तर भारत में बारिश का कहर जारी रहेगा
पूर्वोत्तर भारत फिलहाल सबसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में बना हुआ है. अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले 5 से 6 दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है.
असम और मेघालय में 6 और 7 जून को गरज-चमक के साथ व्यापक वर्षा हो सकती है. कई स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है. वहीं अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में कुछ स्थानों पर अत्यधिक वर्षा भी दर्ज की जा सकती है.
लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन तथा निचले क्षेत्रों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है. प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है.
उत्तर भारत में आंधी-तूफान और बिजली गिरने का खतरा
उत्तर भारत में पिछले कुछ दिनों से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. इसके कारण जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदला हुआ रहेगा.
मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान, पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 5 जून तक गरज-चमक के साथ बारिश और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं.
उत्तराखंड में 4 और 5 जून को भारी बारिश की संभावना जताई गई है. वहीं हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि भी हो सकती है. राजस्थान के कुछ जिलों में भी ओले गिरने की चेतावनी जारी की गई है.
दिल्ली-एनसीआर में भी बादल छाए रहने, धूलभरी हवाओं और हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे तापमान में अस्थायी गिरावट देखने को मिल सकती है.
उत्तर प्रदेश में मौसम रहेगा सक्रिय
उत्तर प्रदेश में 5 जून को पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में मौसम गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश का पूर्वानुमान है. वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कई स्थानों पर बादल गरजने और बिजली चमकने की संभावना जताई गई है.
हालांकि मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 7 जून के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश और 8 जून के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हीटवेव की स्थिति विकसित हो सकती है. इसलिए लोगों को बदलते मौसम के बावजूद गर्मी से बचाव के उपाय जारी रखने की सलाह दी गई है.
बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी मौसम बदलेगा
पूर्वी भारत के राज्यों में भी अगले कुछ दिनों तक मौसम सक्रिय रहने वाला है. बिहार, झारखंड, ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल और सिक्किम में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है.
बिहार में 5 जून और फिर 7 से 10 जून के बीच बारिश और आंधी-तूफान की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं. हालांकि इसके बावजूद राज्य के कुछ इलाकों में तापमान बढ़ने का अनुमान है. मौसम विभाग ने 6 से 8 जून के बीच बिहार के कुछ हिस्सों में लू चलने की चेतावनी भी जारी की है.
सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में अगले कई दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है.
मध्य भारत में तेज आंधी और थंडरस्क्वॉल का अलर्ट
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में भी मौसम विभाग ने गंभीर गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है.
पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. कुछ स्थानों पर हवा की गति झोंकों के दौरान 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. मौसम विभाग ने इसे थंडरस्क्वॉल की स्थिति बताया है.
छत्तीसगढ़ और विदर्भ में भी अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं का खतरा बना रहेगा. मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है.
महाराष्ट्र और गुजरात में भी बारिश का असर
पश्चिम भारत के राज्यों में भी मानसून पूर्व गतिविधियां तेज बनी हुई हैं. कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात और सौराष्ट्र-कच्छ के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश का पूर्वानुमान है.
कोंकण और गोवा में 10 जून तक भारी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है. मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में भी बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है.
तापमान में फिलहाल बड़े बदलाव के संकेत नहीं
मौसम विभाग के अनुसार देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत में 6 जून के बाद तापमान में धीरे-धीरे 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि हो सकती है. पूर्वी भारत में भी तापमान लगभग स्थिर रहेगा, लेकिन बिहार में 6 जून तक 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी संभव है.
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की प्रगति सामान्य बनी हुई है और अगले कुछ दिनों में इसके तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है.
लोगों के लिए क्या है सलाह?
मौसम विभाग ने जिन क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है, वहां लोगों को खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है. भारी बारिश वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने को कहा गया है.
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विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून केरल में प्रवेश कर चुका है और अब आने वाले दिनों में इसके उत्तर और पूर्व दिशा में तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है. इसके चलते देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम गतिविधियां और अधिक सक्रिय हो सकती हैं.
5 जून का मौसम देशभर में विविध परिस्थितियों वाला रहने वाला है. एक ओर दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा, वहीं उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में आंधी-तूफान और तेज हवाएं लोगों की चिंता बढ़ा सकती हैं. ऐसे में मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों पर नजर बनाए रखना बेहद जरूरी होगा.


