IPS Harish Chander Success Story: दिल्ली की एक छोटी सी खोली से निकलकर उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों में शुमार होने तक का सफर आसान नहीं था. 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी हरीश चंदर ने गरीबी, संघर्ष और चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर सफलता की नई इबारत लिखी है. अब उन्हें पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी), भ्रष्टाचार निवारण संगठन, लखनऊ की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है.
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उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किए गए हालिया तबादलों में हरीश चंदर को कानपुर परिक्षेत्र के डीआईजी पद से हटाकर भ्रष्टाचार निवारण संगठन में नियुक्त किया गया है. उनकी जीवन यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत मानी जाती है.
गरीबी के बीच बड़े सपनों की उड़ान
दिल्ली के गुरु तेगबहादुर नगर की एक साधारण खोली में पले-बढ़े हरीश चंदर का बचपन आर्थिक कठिनाइयों के बीच बीता. सीमित संसाधनों के बावजूद उनके माता-पिता ने शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया. पढ़ाई के दौरान कम अंक मिलने पर उन्हें निराशा का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार आगे बढ़ते रहे.
स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार की जिम्मेदारियों के चलते नौकरी का विचार आया, लेकिन जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) मिलने से उन्हें अपने सपनों को नई दिशा देने का अवसर मिला. महज 22 वर्ष की उम्र में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा उत्तीर्ण कर आईपीएस अधिकारी बनने का सपना साकार कर लिया.
पुलिस की छवि बदलने के लिए चुनी आईपीएस सेवा
हरीश चंदर के अनुसार, उन्हें ऐसी रैंक प्राप्त हुई थी जिससे वे अन्य प्रतिष्ठित सेवाओं में भी जा सकते थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर आईपीएस सेवा को चुना. बचपन में उन्होंने पुलिस की एक कठोर छवि देखी थी और तभी संकल्प लिया था कि वह पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत करने का प्रयास करेंगे.
15 हजार करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले का किया खुलासा
अपने सेवा काल में हरीश चंदर ने महोबा, कन्नौज, औरैया, गोरखपुर, मुरादाबाद और नोएडा समेत कई जिलों में अहम जिम्मेदारियां संभालीं. नोएडा में डीसीपी रहते हुए उन्होंने फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए संचालित करीब 15 हजार करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले का पर्दाफाश किया. इस कार्रवाई ने राष्ट्रीय स्तर पर भी काफी चर्चा बटोरी और कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई.
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युवाओं को देते हैं संघर्ष से लड़ने का संदेश
हरीश चंदर का मानना है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. उनका संदेश है कि निराशा के आगे झुकने के बजाय उम्मीद और संघर्ष का रास्ता चुनना चाहिए. यही सोच उन्हें आज उत्तर प्रदेश पुलिस के सबसे प्रेरणादायक अधिकारियों में शामिल करती है. दिल्ली की खोली से शुरू हुआ यह सफर आज डीआईजी के पद तक पहुंच चुका है, जो साबित करता है कि मजबूत इरादों के सामने अभाव और कठिनाइयां भी छोटी पड़ जाती हैं.


