देहरादून: राजधानी देहरादून में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को लेकर लंबे समय से चल रही कवायद अब नए मोड़ पर पहुंच गई है. शहर में प्रस्तावित नियो मेट्रो की जगह अब इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (ई-बीआरटीएस) को आगे बढ़ाने की तैयारी है. खास बात यह है कि बसें सामान्य सड़क पर ट्रैफिक के बीच नहीं, बल्कि एलिवेटेड कॉरिडोर पर चलाने की योजना है.
उत्तराखंड मेट्रो रेल अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (UKMRC) की रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून में मेट्रो नियो की जगह ई-बस/ई-बीआरटीएस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है. इसके लिए विस्तृत डिजाइन और तकनीकी अध्ययन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है.
यह भी पढ़ें- गंगा के ऊपर से पटना से सीधे सोनपुर पहुंचेंगे, 5 महीने में शुरू होगा रोपवे का काम, सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान
24 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस, सड़क के बीचों-बीच बनेगा कॉरिडोर
प्रस्तावित सिस्टम में करीब 24 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है. एलिवेटेड फ्लाईओवर की तर्ज पर कॉरिडोर को सड़क के बीच मौजूद डिवाइडर वाले हिस्से में पिलर खड़े करके तैयार किया जाएगा. यानी दून की सड़कों पर बस और बाकी वाहनों के बीच सीधे मुकाबले के बजाय ई-बीआरटीएस के लिए अलग कॉरिडोर बनाया जाएगा. इसका उद्देश्य शहर के व्यस्त इलाकों में सार्वजनिक परिवहन को तेज और व्यवस्थित बनाना है.
दो प्रमुख कॉरिडोर पर चलेगी बस
प्रस्ताव के मुताबिक पहला कॉरिडोर प्रेमनगर से रायपुर तक जाने की योजना है. यह बल्लूपुर चौक, किशननगर चौक, घंटाघर, आराघर चौक, नेहरू कॉलोनी, अपर नत्थनपुर, ऑर्डिनेंस फैक्टरी और हाथीखाना चौक से होकर गुजरेगा. दूसरा कॉरिडोर आईएसबीटी से मसूरी डायवर्जन तक प्रस्तावित है. इसका रास्ता लालपुल, सहारनपुर चौक, रेलवे स्टेशन, घंटाघर, गांधी पार्क और दिलाराम चौक से होकर जाएगा.
क्यों बदला गया नियो मेट्रो का प्लान?
UKMRC की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि देहरादून में प्रस्तावित Metro Neo के डीपीआर को केंद्र के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने मई 2025 में वापस किया था और शहर की यातायात जरूरतों को देखते हुए ई-बस या बीआरटीएस जैसे अपेक्षाकृत लागत-प्रभावी विकल्पों पर विचार करने का सुझाव दिया गया था. इसके बाद e-Bus/e-BRTS को Metro Neo के विकल्प के रूप में आगे बढ़ाया गया. जनवरी 2026 में UKMRC बोर्ड ने देहरादून में ई-बीआरटी सिस्टम के दो प्रमुख कॉरिडोर के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी भी दी थी. इसके बाद आवश्यक तकनीकी अध्ययन कराने के निर्देश दिए गए.
सड़क चौड़ीकरण और जमीन अधिग्रहण की भी तैयारी
ई-बीआरटीएस का एलिवेटेड कॉरिडोर सड़क के बीचों-बीच बनेगा, इसलिए मौजूदा सड़क की चौड़ाई अहम चुनौती है. पीडब्ल्यूडी के अनुसार कई जगह सड़क के बीच मौजूदा डिवाइडर करीब आधा मीटर चौड़ा है, जबकि प्रस्तावित गोल पिलर करीब डेढ़ मीटर जगह ले सकते हैं. ऐसे में सामान्य ट्रैफिक प्रभावित न हो, इसके लिए कुछ स्थानों पर सड़क चौड़ीकरण, भूमि अधिग्रहण और फुटपाथ निर्माण की जरूरत होगी. इसके लिए करीब 570 करोड़ रुपये का प्रस्ताव परियोजना में शामिल करने के लिए भेजा गया है.
यह भी पढ़ें- भारत में रिटेल मार्केट की बढ़ी मांग, Grade-A मॉल की Vacancy 4.8% पर पहुंची, 2028 तक आएगा 12.7 MSF नया स्पेस
स्टेशन पर मिलेगी मेट्रो जैसी सुविधा
ई-बीआरटीएस को सिर्फ इलेक्ट्रिक बस सेवा के तौर पर नहीं, बल्कि एक आधुनिक रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के रूप में विकसित करने की योजना है. प्रस्तावित व्यवस्था में डेडिकेटेड कॉरिडोर, ऑफ-बोर्ड टिकटिंग और प्रमुख टर्मिनलों पर फास्ट चार्जिंग जैसी सुविधाएं शामिल की जा रही हैं. अगर परियोजना तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो देहरादून में सार्वजनिक परिवहन का स्वरूप काफी बदल सकता है. फिलहाल इसके लिए डिजाइन, तकनीकी और व्यवहार्यता से जुड़े अध्ययन आगे बढ़ाए जा रहे हैं और विस्तृत परियोजना प्रस्ताव के बाद अगला निर्णय लिया जाएगा.


