Haridwar-Rishikesh Ganga Corridor: उत्तराखंड में तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को लंबे समय से हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच लगने वाले जाम से जूझना पड़ता है. अब इस समस्या से राहत दिलाने के लिए धामी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए निर्माणाधीन हरिद्वार‑ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के लिए 20 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि देने की घोषणा की.
यह परियोजना उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है, जिसे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल लोक कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है. करीब 15 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का उद्देश्य हरिद्वार और ऋषिकेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण, भीड़ प्रबंधन और तीर्थयात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना है.
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कनखल से तपोवन तक जुड़ेगा पूरा क्षेत्र
प्रस्तावित गंगा कॉरिडोर हरिद्वार में दक्ष मंदिर (कनखल) से शुरू होकर हर की पैड़ी, भूपतवाला (दूधाधारी चौक) और सप्तऋषि आश्रम तक जाएगा. वहीं ऋषिकेश में तपोवन, त्रिवेणी घाट, रेलवे स्टेशन और ISBT क्षेत्र को भी इस परियोजना में शामिल किया गया है.
पहले 3000 करोड़ का था बजट
जानकारी के अनुसार इस परियोजना के लिए पहले करीब 3000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था. अब 2026-27 के बजट में 20 करोड़ रुपये और बढ़ाए गए हैं. सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है.
पैदल पथ और नया ISBT भी बनेगा
गंगा कॉरिडोर परियोजना के तहत दोनों शहरों के व्यस्त हिस्सों में भीड़ कम करने के लिए पैदल यात्रियों के लिए अलग मार्ग बनाए जाएंगे. जाम की समस्या को कम करने के लिए ISBT को शहर से बाहर स्थानांतरित करने की योजना भी है. इसके अलावा शांतिकुंज से कनखल तक करीब 3.5 किलोमीटर क्षेत्र के सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव भी शामिल किया गया है.
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बड़े कॉरिडोर से भी जुड़ेगा हरिद्वार
सरकार की योजना के अनुसार हरिद्वार को दिल्ली‑देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर और गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार से भी जोड़ा जाएगा. इससे यात्रियों का सफर पहले से तेज, आसान और सुविधाजनक होने की उम्मीद है.


