Etawah Railway Flyover: दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर ट्रेनों के परिचालन को और सुगम बनाने के लिए इटावा में 866.06 करोड़ रुपये की लागत से 9.711 किलोमीटर लंबा रेल फ्लाईओवर बनाया जा रहा है. राहतपुर गांव के पास बन रहे इस फ्लाईओवर के पूरा होने के बाद इटावा-मैनपुरी, इटावा-भिंड और इटावा-आगरा ब्रांच रेल लाइनों की ट्रेनों को दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेलमार्ग को सतह पर क्रॉस करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
रेलवे ने परियोजना को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. फ्लाईओवर तैयार होने के बाद ब्रांच लाइनों की ट्रेनों के लिए अलग रेल मार्ग उपलब्ध होगा. इससे क्रॉसिंग के कारण होने वाले इंतजार में कमी आएगी और ट्रेनों की गति के साथ समयपालन में भी सुधार होने की उम्मीद है.
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15 मिनट तक रुकती हैं ट्रेनें
फिलहाल इटावा आने-जाने वाली ब्रांच लाइन की ट्रेनों को दिल्ली-हावड़ा की व्यस्त अप और डाउन मेन लाइन को पार करना पड़ता है. मुख्य मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही अधिक होने के कारण ब्रांच लाइन की ट्रेनों को कई बार क्रॉसिंग मिलने तक इंतजार करना पड़ता है.
मौजूदा व्यवस्था में ट्रेनों को करीब 15 मिनट तक रुकना पड़ सकता है. फ्लाईओवर बनने के बाद इस समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है. परियोजना से जुड़ी जानकारी के अनुसार, ग्वालियर-आगरा की ओर से इटावा आने और मैनपुरी की ओर जाने वाली ट्रेनों को अलग मार्ग उपलब्ध कराया जाएगा. इससे करीब दो दर्जन यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन में समय की बचत हो सकती है.
तीन ब्रांच लाइनों को मिलेगा सीधा लिंक
इटावा जंक्शन से वाह-आगरा, भिंड-ग्वालियर और मैनपुरी की ओर जाने वाली ब्रांच लाइनों को जोड़ने के उद्देश्य से इस फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है. परियोजना पूरी होने के बाद इन तीनों दिशाओं की ट्रेनों को मुख्य दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर बार-बार क्रॉसिंग लेने की जरूरत कम होगी. इससे मुख्य रेलमार्ग पर भी ट्रेनों के परिचालन को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी और ब्रांच लाइन की ट्रेनों को जंक्शन तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग मिलेगा.
आठ गांवों से होकर गुजरेगा फ्लाईओवर
प्रस्तावित रेल फ्लाईओवर इटावा और जसवंतनगर तहसील के आठ गांवों से होकर गुजरेगा. इनमें इटावा तहसील के कांधनी, आलमपुर हौज, बुलाकीपुर लुहन्ना, सराय ऐसर, विचारपुरा, डूंगरी और हरसौली तथा जसवंतनगर तहसील का सैदपुरा गांव शामिल है.
फ्लाईओवर का डिजाइन इस तरह तैयार किया जा रहा है कि ग्वालियर-भिंड, बाह-आगरा और मैनपुरी की ओर से आने वाली ट्रेनें मुख्य दिल्ली-हावड़ा रेल लाइन को क्रॉस किए बिना इटावा जंक्शन तक पहुंच सकें.
89.28 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण पूरा
परियोजना के लिए कुल 2,10,170 वर्गमीटर भूमि की आवश्यकता है. इसमें से अब तक 1,87,657 वर्गमीटर यानी 89.28 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण पूरा किया जा चुका है. भूमि अधिग्रहण के एवज में अब तक 65.89 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया गया है. रेलवे की ओर से भूमि अधिग्रहण के लिए 75 करोड़ रुपये दो किस्तों में जमा कराए जा चुके हैं.
2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
इटावा-टूंडला रेलखंड के बीच इस कनेक्टिविटी परियोजना पर काम वर्ष 2017 में शुरू किया गया था. इसका उद्देश्य इटावा जंक्शन से जुड़ी तीनों ब्रांच रेल लाइनों को मुख्य दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग से अलग और बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है.
परियोजना पूरी होने के बाद मुख्य लाइन पर ट्रेनों को रास्ता देने के लिए ब्रांच लाइन की ट्रेनों को बार-बार रोकने की जरूरत कम होगी. इसका फायदा यात्री ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों को भी मिलेगा.
प्रयागराज मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अमित कुमार सिंह के अनुसार, परियोजना का प्रमुख उद्देश्य ट्रेनों को मुख्य लाइन पर रास्ता देने के लिए होने वाले ठहराव को कम करना है. इससे ट्रेनों के परिचालन, समयपालन और रेलखंड की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है.
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क्यों खास है इटावा का यह रेल फ्लाईओवर?
यह फ्लाईओवर तैयार होने के बाद इटावा में दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेलमार्ग और तीन प्रमुख ब्रांच लाइनों के बीच एक वैकल्पिक कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी. इससे क्रॉसिंग और डिटेंशन कम होने के साथ रेल परिचालन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.


