Windfall Tax Update: केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल गेन टैक्स में महत्वपूर्ण कमी करने का फैसला लिया है. वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लागू विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को कम कर दिया गया है. नई दरें 1 जून से प्रभावी हो गई हैं.
पेट्रोल पर टैक्स आधा किया गया
सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगाए जाने वाले विंडफॉल टैक्स को आधा कर दिया है. पहले जहां इस पर 3 रुपये प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जा रहा था, वहीं अब इसे घटाकर 1.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. सरकार हर दो सप्ताह में इस कर की समीक्षा करती है और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के आधार पर इसमें बदलाव किया जाता है.
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डीजल और एटीएफ पर भी मिली राहत
डीजल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में भी कटौती की गई है. यह कर पहले 16.50 रुपये प्रति लीटर था, जिसे अब घटाकर 13.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. इसी प्रकार एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर लागू टैक्स को 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 9.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.
घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा असर
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल निर्यात होने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होगा. देश में उपयोग किए जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर वर्तमान कर व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. इसके अलावा पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाला सड़क एवं अवसंरचना उपकर (Road and Infrastructure Cess) शून्य रहेगा.
जुलाई 2022 में शुरू हुआ था विंडफॉल टैक्स
भारत में पहली बार विंडफॉल टैक्स जुलाई 2022 में लागू किया गया था. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया था. तेल उत्पादों की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने और असामान्य मुनाफे को नियंत्रित करने के उद्देश्य से निर्यात शुल्क लगाया गया था.
निजी रिफाइनरी कंपनियों पर पड़ता है सबसे ज्यादा प्रभाव
विंडफॉल टैक्स में बदलाव का सबसे अधिक असर निजी क्षेत्र की बड़ी रिफाइनिंग कंपनियों पर पड़ता है. इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज प्रमुख है, जो बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करती है. कंपनी देश की प्रमुख डीजल और एटीएफ निर्यातकों में शामिल है.
रिलायंस की गुजरात के जामनगर में स्थित दो रिफाइनरियों में बड़ी मात्रा में एटीएफ का उत्पादन होता है. यहां बनने वाला ईंधन देश के कुल एटीएफ उत्पादन का लगभग एक चौथाई हिस्सा माना जाता है, जिसका बड़ा भाग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किया जाता है. इसके अलावा ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी कंपनियां भी पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
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क्या है इसका महत्व?
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात शुल्क में यह कटौती पेट्रोलियम निर्यातकों को राहत प्रदान करेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रिफाइनरियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने में मदद करेगी. हालांकि घरेलू ईंधन उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल किसी प्रकार के कर बदलाव की घोषणा नहीं की गई है.


