Jalaun News: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के विकासखंड नदीगांव क्षेत्र से राशन वितरण में गंभीर धांधली और भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है. ग्राम पंचायत रूरा सिरसा की प्रधान जानकी देवी के नेतृत्व में दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी (DM) राजेश कुमार पांडेय को शिकायती पत्र सौंपकर गांव के कोटेदार शिववीर सिंह पर राशन हड़पने और अभद्रता करने के गंभीर आरोप लगाए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि कोटेदार हर राशन कार्ड धारक के हक पर डाका डाल रहा है, जिससे गरीब परिवारों में भारी आक्रोश है.
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प्रति कार्ड 2 किलो राशन कम देने का आरोप, वीडियो वायरल
जिलाधिकारी को सौंपे गए शिकायती पत्र में 26 कार्डधारकों ने बताया कि सरकारी नियमों के अनुसार प्रति चार यूनिट पर 20 किलोग्राम खाद्यान्न मिलने का प्रावधान है. लेकिन कोटेदार शिववीर सिंह दबंगई दिखाते हुए केवल 18 किलोग्राम राशन ही दे रहा है. यानी हर गरीब परिवार को सीधे-सीधे 2 किलो गेहूं और चावल कम तौलकर दिया जा रहा है. कोटेदार की इस घटतौली का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है.
‘गोदाम से ही बोरी कम आती है’- कोटेदार का अजीब तर्क
ग्राम प्रधान जानकी देवी और ग्रामीणों के अनुसार, जब कोटेदार से इस घटतौली और कम राशन देने का कारण पूछा गया, तो उसने बेहद अजीब और गैर-जिम्मेदाराना तर्क दिया. कोटेदार का कहना है कि गोदाम से ही आने वाली 50 किलोग्राम की बोरी का वास्तविक वजन कम निकलता है, इसलिए वह भी राशन कम तौलकर बांट रहा है. हालांकि, ग्राम प्रधान ने इस तर्क को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि कोटेदार लंबे समय से इस तरह की अनियमितता और धांधली करने का आदी हो चुका है और वह जानबूझकर सरकारी खाद्यान्न व्यवस्था को चूना लगा रहा है.
विरोध करने पर मिलती है धमकी, लाइसेंस निरस्त करने की मांग
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब भी कोई गरीब या जरूरतमंद ग्रामीण इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है, तो कोटेदार शिववीर सिंह उन्हें धमकाने और डराने का प्रयास करता है. इस दबंगई के कारण कई गरीब लाभार्थी खुलकर अपनी बात भी नहीं रख पाते हैं.
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मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम प्रधान जानकी देवी ने जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है. प्रधान और ग्रामीणों का कहना है कि आरोप सिद्ध होने पर आरोपी कोटेदार शिववीर सिंह के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और तत्काल प्रभाव से उसका उचित दर विक्रेता (कोटा) लाइसेंस निरस्त किया जाए, ताकि गरीबों को उनका पूरा हक मिल सके.


