दिल्ली-मुंबई हाई-स्पीड कॉरिडोर के तहत रेलवे ने पलवल-मथुरा सेक्शन में हाई-स्पीड ट्रेन संचालन की तैयारियां तेज कर दी हैं. आगरा मंडल के छाता रेलवे स्टेशन स्थित ट्रैक्शन सब-स्टेशन यानी TSS को फॉरवर्ड चार्जिंग के साथ शुरू कर दिया गया है. इससे हाई-स्पीड ट्रेनों के संचालन के लिए जरूरी विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
रेलवे के मुताबिक पलवल-मथुरा सेक्शन में 160 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनों के संचालन की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं. छाता के अलावा कोसीकलां और शोलाका स्टेशन पर भी संबंधित काम पूरा किया जा चुका है. वहीं होडल में काम अंतिम चरण में बताया गया है.
इस व्यवस्था के पूरी तरह तैयार होने के बाद ट्रेनों को जरूरत के अनुसार वोल्टेज उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी और हाई-स्पीड संचालन के लिए जरूरी विद्युत ढांचे को मजबूत किया जा सकेगा.
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हाई-स्पीड संचालन के लिए तैयार हो रहा पलवल-मथुरा सेक्शन
उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा के अनुसार, मिशन रफ्तार के तहत दिल्ली और मुंबई के बीच रेल यात्रा का समय 12 घंटे के भीतर लाने का लक्ष्य रखा गया है.
इसी उद्देश्य से पलवल-मथुरा सेक्शन को हाई-स्पीड ट्रेन संचालन के अनुरूप तैयार किया जा रहा है. उत्तर मध्य रेलवे के अनुसार, करीब 84 रूट किलोमीटर और 336 ट्रैक किलोमीटर लंबे इस सेक्शन में 160 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति को ध्यान में रखकर अलग-अलग विभागों में काम किया जा रहा है.
इसमें सिविल, इलेक्ट्रिकल, सिग्नलिंग एवं दूरसंचार और मैकेनिकल विभाग शामिल हैं. यानी केवल ट्रैक और बिजली व्यवस्था ही नहीं, बल्कि हाई-स्पीड संचालन से जुड़े कई तकनीकी हिस्सों को एक साथ तैयार किया जा रहा है.
छाता के साथ इन स्टेशनों पर भी काम आगे बढ़ा
छाता TSS को फॉरवर्ड चार्जिंग के साथ शुरू किए जाने के अलावा कोसीकलां, शोलाका और मथुरा सब स्टेशन को भी शुरू किया जा चुका है.
वहीं वृंदावन, कोटवन, होडल और अजई में इस परियोजना से जुड़े काम को सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
रेलवे के मुताबिक हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए ओवरहेड इक्विपमेंट यानी OHE व्यवस्था में भी बदलाव किए जा रहे हैं. इसके तहत उच्च तनाव झेलने वाले सुपर मास्ट लगाए जा रहे हैं.
इन बदलावों का उद्देश्य हाई-स्पीड ट्रेनों के संचालन के लिए जरूरी विद्युत और ओवरहेड सिस्टम को तैयार करना है. आने वाले समय में ट्रेनें अपनी निर्धारित क्षमता और रफ्तार के अनुसार संचालन कर सकेंगी.
क्या होता है Traction Sub-Station यानी TSS
रेल अधिकारियों के अनुसार, TSS यानी Traction Sub-Station वह विद्युत संयंत्र है जिसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक ट्रेनों को बिजली उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है.
TSS में राज्य विद्युत ग्रिड से उच्च वोल्टेज बिजली प्राप्त की जाती है. इसके बाद इसे आवश्यक व्यवस्था के अनुसार परिवर्तित करके ओवरहेड इक्विपमेंट यानी OHE को सप्लाई किया जाता है. OHE के जरिए इलेक्ट्रिक ट्रेनों के इंजन को बिजली मिलती है.
हाई-स्पीड रेल संचालन में लगातार और उपयुक्त विद्युत आपूर्ति महत्वपूर्ण होती है. इसी वजह से ट्रैक्शन पावर सिस्टम से जुड़े सब-स्टेशनों और दूसरे उपकरणों को हाई-स्पीड संचालन की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जा रहा है.
SSP और ट्रैक्शन पावर सिस्टम की भूमिका
रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, दो ट्रैक्शन सब-स्टेशनों के बीच एक सेंटर होता है, जो ट्रेन संचालन के लिए OHE को नियंत्रित करने में मदद करता है. इसे सेक्शनिंग पोस्ट यानी SP से जोड़ा गया है.
वहीं SSP यानी Sub-Sectioning and Paralleling Post ट्रैक्शन पावर सप्लाई सिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसे मुख्य ट्रैक्शन सब-स्टेशन और सेक्शनिंग पोस्ट के बीच लोड के अनुसार लगाया जाता है.
इस तरह TSS, SP और SSP मिलकर ट्रैक्शन पावर सप्लाई सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों को नियंत्रित और व्यवस्थित करने में भूमिका निभाते हैं.
200 किमी प्रति घंटे की तैयारी का क्या मतलब है
पलवल-मथुरा सेक्शन में 160 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति को ध्यान में रखकर रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार कर रहा है. इसके लिए अलग-अलग विभागों में काम चल रहा है और बिजली आपूर्ति से जुड़े TSS तथा OHE सिस्टम को भी अपग्रेड किया जा रहा है.
छाता TSS का फॉरवर्ड चार्जिंग के साथ शुरू होना इसी तैयारी का हिस्सा है. इसके अलावा कोसीकलां और शोलाका समेत अन्य स्थानों पर भी संबंधित काम आगे बढ़ चुका है.
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रेलवे का लक्ष्य इस पूरे सेक्शन को हाई-स्पीड संचालन के अनुरूप तैयार करना है. इसके तहत सितंबर तक कुछ शेष कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. परियोजना पूरी होने के बाद पलवल-मथुरा रेल सेक्शन में हाई-स्पीड संचालन के लिए तैयार किया गया बुनियादी ढांचा दिल्ली-मुंबई रेल कनेक्टिविटी को तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.


