Rahul Gandhi Chennai Visit: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शनिवार को तमिलनाडु के चेन्नई में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले हैं. कांग्रेस की ओर से शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य देशभर के छात्रों से सीधे संवाद करना और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी उनकी समस्याओं को समझना है. परीक्षा में गड़बड़ी, पेपर लीक, बढ़ती शिक्षा लागत, भर्ती प्रक्रिया और बेरोजगारी जैसे मुद्दे इस अभियान के केंद्र में हैं.
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कांग्रेस ने छात्रों की समस्याओं को राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से इस अभियान की शुरुआत की थी. इसकी शुरुआत 17 जून को राजस्थान के कोटा से हुई थी. इसके बाद राहुल गांधी ने उत्तराखंड के देहरादून, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और मध्य प्रदेश के इंदौर में छात्रों से संवाद किया. अब इस अभियान का अगला पड़ाव चेन्नई है.
इंदौर में शिक्षा व्यवस्था पर उठाए थे सवाल
पिछले महीने इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि इसका मकसद शिक्षा व्यवस्था से छात्रों का टूटता भरोसा फिर से कायम करना है. उन्होंने कहा कि छात्र दोबारा शिक्षा और व्यवस्था पर विश्वास कर सकें, इसके लिए जरूरी है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए. राहुल गांधी ने परीक्षा के पेपर लीक होने, संस्थानों के कामकाज, अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भूमिका और क्रिकेट प्रशासन में जय शाह की नियुक्ति जैसे मुद्दों का जिक्र किया था. उन्होंने छात्रों से सवाल पूछने और व्यवस्था की कमियों पर आवाज उठाने का आह्वान भी किया था.
राहुल गांधी का बयान चर्चा में
इंदौर में राहुल गांधी ने सवाल उठाने वाले छात्रों और उनके मुताबिक ‘अंधभक्तों’ के बीच अंतर बताते हुए कहा था कि एक छात्र जिज्ञासु होता है और सवाल पूछता है, जबकि अंधभक्त सवाल नहीं करता. उन्होंने छात्रों को निडर होकर अपनी बात रखने की सलाह दी थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान विष्णु का अवतार बताने वाले दावों का जिक्र करते हुए भी राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे से जुड़े सवाल उठाए थे. उन्होंने पूछा था कि अगर विकास हो रहा है, तो स्कूलों और कॉलेजों की स्थिति खराब क्यों है और परीक्षाओं में पेपर लीक होने की घटनाएं क्यों सामने आती हैं.
छात्रों के किन मुद्दों पर रहेगा फोकस?
‘छात्रों की गूंज’ अभियान के जरिए कांग्रेस छात्रों से जुड़ी कई अहम समस्याओं को सामने लाने की कोशिश कर रही है. इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताएं, पेपर लीक, शिक्षा का बढ़ता खर्च, भर्ती प्रक्रिया में देरी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे शामिल हैं. चेन्नई में होने वाले कार्यक्रम के दौरान भी छात्रों से संवाद के जरिए इन समस्याओं को समझने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उठाने पर जोर रहने की उम्मीद है. इस अभियान के जरिए कांग्रेस युवाओं और छात्रों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाना चाहती है.
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