Farrukhabad Illegal Mining: उत्तर प्रदेश सरकार भले ही अवैध खनन पर “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा करती हो, लेकिन फर्रुखाबाद जिले के राजेपुर थाना क्षेत्र के ग्राम चाचूपुर की तस्वीर इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है. यहां इन दिनों अवैध खनन का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे खेल को स्थानीय स्तर पर संरक्षण प्राप्त है और रात के अंधेरे में मिट्टी और रेत का अवैध उठान धड़ल्ले से किया जा रहा है.
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एसी कमरों में अधिकारी, मैदान में सक्रिय माफिया
सरकार खनन विभाग के अधिकारियों को लाखों रुपये वेतन इसीलिए देती है ताकि अवैध खनन जैसे अपराधों पर रोक लगाई जा सके, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलने तक की जहमत नहीं उठा रहे, जिसका फायदा खनन माफिया पूरी तरह से उठा रहे हैं. नतीजा यह है कि गांव की जमीन को रात-दिन खोखला किया जा रहा है.
रात होते ही शुरू हो जाता है ‘खनन का खेल’
ग्रामीणों के अनुसार जैसे ही अंधेरा गहराता है, वैसे ही प्रतिबंधित क्षेत्रों में जेसीबी मशीनों और भारी ट्रकों की आवाजाही शुरू हो जाती है. पूरी रात अवैध तरीके से मिट्टी और रेत का खनन किया जाता है. लोगों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को इसकी पूरी जानकारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चुप्पी साध ली जाती है.
किसानों की जमीन हो रही बर्बाद
अवैध खनन का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है. खेतों के किनारे कट रहे हैं, जिससे उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है. इसके अलावा अंधाधुंध खुदाई के कारण क्षेत्र का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में खेती करना भी मुश्किल हो जाएगा.
पर्यावरण पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार नदी किनारों और तटीय क्षेत्रों में इस तरह का अवैध खनन भविष्य में गंभीर आपदा का कारण बन सकता है. जमीन धंसने (लैंड सब्सिडेंस) और बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ सकता है. लेकिन इसके बावजूद खनन माफिया चंद पैसों की लालच में प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे.
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आखिर कब जागेगा प्रशासन?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? क्या चाचूपुर में चल रहे इस काले कारोबार पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या फिर माफियाओं का यह ‘रात का खेल’ यूं ही चलता रहेगा? अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और खनन विभाग के अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं.


